माननीय प्रधानमंत्रीजी
भारत सरकार,नई दिल्ली
विषय - विनम्रतापूर्वक तथ्यात्मक ट्रेन स्टॉपेज की मांग को लगातार अनदेखी करने वावत।
माननीय प्रधानमंत्रीजी मैं जानना चाहता हूँ की सरकार द्वारा उन मांगों को तरहीज क्यों नही दी जाती जिनमें उग्र प्रदर्शन,शासकीय संपत्ति को नुकसान न पहुंचाया जाता हो बल्कि विनम्रता से जायज शांतिपूर्णमांग क्षेत्र के लोगों द्वारा लाभान्वित होने सरकार की उद्देश्य पूर्ती में सहयोगी हो। माननीय विषय के अनुसार मध्य रेल के जबलपुर मंडल से चलाई जाने वाली स्वास्थ्य सेवा हेतु नागपुर से जोड़ने वाली 12160अमरावती ट्रेन इसी क्षेत्र के लोगों को लाभान्वित करने चलाई जाती हैं। BKH बनखेड़ी का नगर परिषद एवं तहसील मुख्यालय लगभग 150 गावँ से सीधा जुड़ा है जहां रात्रि में 8 बजे से सुबह 6 बजे तक किसी भी ट्रेन का स्टॉपेज नही हैं। जिसकी शांतिपूर्ण मांग बनखेड़ी संघर्ष समिति द्वारा विगत दो वर्षों से किया जा रहा हैं। जो इस बड़े कृषि बाहुल्य क्षेत्र की आत्मनिर्भरता में विगत कई वर्षों से बाधक बना हुआ हैं। आपको अवगत कराना चाहूंगा कि इस ज्वलंत मांग की निराधार अनदेखी रेल मंडल द्वारा जारी हैं। पत्र के माध्यम से दो बिंदुओं पर अपनी वेदना प्रकट करने की मंशा आपके न्यायोचित हस्तक्षेप हेतु प्रस्तुत हैं-
(1) क्या सहयोगी राष्ट्र हित विचारधारा की आवाम को उनकी जायज मांगो और सुविधाओं को नजर अंदाज कर उग्रता हेतु विवश किया जाता हैं तब जाकर सरकार का ध्यानाकर्षित होता हैं ?
(2) आम जनता का ग्रामों से पलायन न हो इसलिए सरकार ग्रामीण अंचलों को आत्मनिर्भर बनाने वचनबद्ध हैं,फिर उसी जनता को सुविधा देने किसी भी एक रात्रीकालीन ट्रेन का महज 1 मिनिट का स्टॉपेज देना क्यों संभव नही हैं जबकि रेलवे के आंकड़े बताते है कि जबलपुर मंडल से चलने वाली ट्रेनों में 1 से 2 मिनिट की गुंजाइश रेल रेवेन्यू को प्रभावित नही करती । जबकि बनखेड़ी BKH रेलवे स्टेशन का रेल रेवेन्यू अल्प सुविधाओं के वावजूद समीपस्थ इस श्रेणी की स्टेशनों से बेहतर हैं।
उक्त माध्यम से आपको अवगत कराना चाहूंगा कि बनखेड़ी bkh रेलवे स्टेशन से डेढ़ लाख की आबादी जुडी हैं। यहाँ सुबह एवं शाम को दो एक्सप्रेस ट्रेनों की सुविधा भी उचित मांग के आधार पर विगत 10 से 20 वर्ष पहले प्रदान की गई थी। समय के साथ बढ़ती आबादी एवं आवश्यकता के लिहाज से रात्रीकालीन ट्रेन की दरकार बेहद अहम हैं। उचित हस्तक्षेप की आशा से आपके समक्ष प्रस्तुत हैं।
प्रार्थी
योगेश शर्मा,
बनखेड़ी
जि - होशंगाबाद (म प्र)