एक चश्मा जो इस समय धड़ल्ले से बिक रहा हैं,
इसके आँखों पर चड़ते ही,राष्ट्रप्रेम उमड़ रहा हैं।।
बड़ी अजीब सी इसमें नजर बंदी हैं,
सरकार को छोड़कर, यहां हर चीज गंदी हैं।।
इसे पहनने से हर कोई,सैनिक की तरह अड़ा हैं,
ये और बात हैं सरहद पर,आतंक अब भी खड़ा हैं।।
इस चश्में को पहनिए,मेरा देश बदल रहा हैं,
सच कहने वाला हर शख्श देश द्रोही बन रहा हैं।।
देश में चश्में का ज्वर ऐसा चढ़ रहा हैं,
नोटबंदी से पीड़ित,व्यापम घोटाला ओझल हो रहा हैं।।
चश्में का असर हैं,सपने बेंचने वाला भगवान हो गया,
गौ- हत्या, राममंदिर भी,रामराज्य में शामिल हो गया।।
नजर के चश्में ने नजरिया ही बदल दिया,
कल महंगाई पर रोने वाला,आज देशभक्त हो गया।।
आप भी एक चश्मा पहन लीजिये,
राष्ट्रभक्ति बहुत सस्ती साहब,आप भी खरीद लीजिये।।
चश्मा पहनने से नजरिया, बदल जाएगा,
घर बैठे ही,राष्ट्र भक्ति का लायसेंस मिल जाएगा।।
रचना- योगेश शर्मा,बनखेड़ी
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