रविवार, 27 नवंबर 2016

एक चश्मा आप भी लीजिये,,,,,

एक चश्मा जो इस समय धड़ल्ले से बिक रहा हैं,
इसके आँखों पर चड़ते ही,राष्ट्रप्रेम उमड़ रहा हैं।।

बड़ी अजीब सी इसमें नजर बंदी हैं,
सरकार को छोड़कर, यहां हर चीज गंदी हैं।।

इसे पहनने से हर कोई,सैनिक की तरह अड़ा हैं,
ये और बात हैं सरहद पर,आतंक अब भी खड़ा हैं।।

इस चश्में को पहनिए,मेरा देश बदल रहा हैं,
सच कहने  वाला हर शख्श देश द्रोही बन रहा हैं।।

देश में चश्में का ज्वर ऐसा चढ़ रहा हैं,
नोटबंदी से पीड़ित,व्यापम घोटाला ओझल हो रहा हैं।।

चश्में का असर हैं,सपने बेंचने वाला भगवान हो गया,
गौ- हत्या, राममंदिर भी,रामराज्य में शामिल हो गया।।

नजर के चश्में ने नजरिया ही बदल दिया,
कल महंगाई पर रोने वाला,आज देशभक्त हो गया।।

आप भी एक चश्मा पहन लीजिये,
राष्ट्रभक्ति बहुत सस्ती साहब,आप भी खरीद लीजिये।।

चश्मा पहनने से  नजरिया, बदल जाएगा,
घर बैठे ही,राष्ट्र भक्ति का लायसेंस मिल जाएगा।।

रचना- योगेश शर्मा,बनखेड़ी

मंगलवार, 22 नवंबर 2016

एक बार हमारे अग्रज बन हमे आजमाइए,,,,,

बनखेड़ी- काश वो एकबार खुलकर यह कह जाते बनखेड़ी के लिए रात्रिकालीन ट्रेन स्टॉपेज की वास्तविक  जरूरत हैं ये कह जाते। खुद आम जनता के नेतृत्व हो जाते मांग जायज हैं इस पर मुहर लगाते। चुना गया इस उम्मीद पर की वो समझ जायंगे इस क्षेत्र का दर्द मगर ये क्या ये मांग को भी विरोध और राजनीतिक मंशा समझेंगे यह तो कुठारघाट हैं उन लाखो लोगों के स्नेह पर जिनने आपके सर पर ताज रखने पल भर भी देर न की। जब आपने तिरंगा यात्रा की कमान संभालकर आगे चले तो वे ही युवा आपके कारवां में शामिल हुए जो आपकी शान के खातिर आप पर जान छिड़कते हैं। बात देश की हो,सरोकार की हो,नदियों को बचाने की जिद हो या स्वच्छता मिशन हो,ग्राम उदय हो या शहीदी पर जज्बा दिखाना हो,,,,,,,,,,,,,बनखेड़ी के युवा कहाँ पीछे हैं। एक ट्रेन का 2 मिनिट का स्टॉपेज ही तो माँगा हैं। क्षेत्र की आत्मनिर्भरता और आपको श्रेय सम्मान देने अपना हक ही तो प्रेम से माँगा हैं। शांति से मर्यादा से गुहार ही तो लगाई हैं।

फिर क्या कारण हैं जबकि आपके पीछे आपके चाहने वालों की इतनी भीड़ हैं।जनाब बेहतर होता आप इन भावनाओ को समझ पाते,घर के मुखिया की तरह हौसला दिखाते। हम तो इतने वर्षों से मजबूर और असहाय हैं और कितना रुकते यह आप अधिकार से बताते। कम से कम इसे विरोध का नाम देकर इस तरह अपमान का घूँट तो न पिलाते। साहब बनखेड़ी के लोगों ने आपको आँख का तारा माना हैं ये विरोध क्यों और किसलिए करेंगे एक बार इतना तो मान जाते। आप अब भी कह दे हमने आपके नेक इरादे पर कब ऊँगली उठाई हैं। ट्रेन के बहाने हमने मर्यादा और शालीनता भी तो दिखाई हैं।

चंद लोगों के कान भरने पर आप हम पर ऊँगली मत उठाइये। इतिहास गवाह हैं जयचंदो ने कब कब वफ़ादारी निभाई हैं। हमने निशान को कहाँ महत्व दिया,हमने तो ईमानदार,नेक और अनुकरणीय व्यक्तित्व पर मुहर लगाई हैं।फिर भी बनखेड़ी क्षेत्र के युवाओं की नियत में खोट नजर आता हैं तो यकीन मानिए हमारे क्षेत्र के दुर्भाग्य ने हमसे हमेशा वफ़ा निभाई हैं। हर बार उगते सूरज से इस बनखेड़ी को रोशन करने प्रार्थना की हैं। हम उपद्रवी नही,जिम्मेदार राष्ट्र के जिम्मेदार युवा हैं। देश का हर गावँ आत्मनिर्भर बने,यातायात को इस दौर में मोहताज न हो। रही बात हमारे आँकड़ो की,रेवेन्यू की तो आप आगे आकर इस संघर्ष को लड़ाई नही हक का दर्जा दिलवाइए। हम आपके साथ हैं एक बार आगे आकर हमें भी अपनाइये,हमें भी खरे सोने सा अहसास कराइये।

उपेक्षित बनखेड़ी क्षेत्र  का व्यथित युवा समाज