बुधवार, 25 जनवरी 2017

कब तक गिड़गिड़ाएं चंद लोग ट्रेन के लिए?

बनखेड़ी (योगेश शर्मा) - ट्रेन स्टॉपेज के लिए कब तक गिड़गिड़ायें भीड़ बढ़ाने और कमजोर प्रतिनिधियों की हौसला अफजाई का ठेका तो हमने ही ले रखा हैं। क्या होगा जो ट्रेन स्टॉपेज न दिया गया। क्या हुआ जिसके लिए सत्ता शासक आपकी सुध लें। जरूरत तो सिर्फ उन चंद लोगों में सिमट कर रह गई हैं जो ट्रेन स्टापेज का मुद्दा मरने नही दे रहें हैं। डर है या हकीकत जिसके चलते बड़े गर्व से भीड़ का हिस्सा बनने हर कोई तैयार खड़ा हैं। कमजोर कौन हैं बेबस लाचार भीड़ या चुनाव के वक्त रहम का टुकड़ा डालकर फोटो के सहारे जननायक बनने की चाह रखने वाले जनप्रतिनिधि ?

क्या सार्वजनिक मंच पर कहने का साहस उन जनप्रतिनिधियों का हैं जो यह कह दे प्रयास तो किये है पर रेल प्रशासन सुन नही रहा,,,,,,,,फिर कमजोर कौन हैं समझा जा सकता हैं। इतने बड़े ट्रेन स्टापेज के मुद्दे को दबाने की कोशिश कामयाब होती नजर आ रही हैं। क्योंकि चंद निजी स्वार्थों के कारण हमने भीड़ बढ़ाने की कमजोरी को सत्ताधारियों की कला में बदल दिया हैं। भावनाओं में  मौसमी देशभक्ति का चलन इस कदर बड़ा की घनघोर अंधियारे में भी क्षेत्र चमकता नजर आता हैं। भाषणों की कलाकारी ने इस कदर प्रभावित किया कि हम अपने क्षेत्र का सम्मान और हक भी भूलने लगें।

इसे दुर्भाग्य ही कहें आवाज उठाने वालों पर मानसिकता का पर्दा होने का आरोप लगाकर उन्हें ही कटघरे में खड़ा करने से भी नही चुके। रेवेन्यू हैं,क्षेत्र का बड़ा रकवा हैं,महती जरूरत है,आम जनमानस की बुनियादी जरूरत से जुड़ा मसला हैं। वावजूद इसके 2 मिनिट का ट्रेन स्टापेज मील का पत्थर साबित हो रहा हैं जिम्मेदार कौन ? क्या रेल विभाग अंग्रेजी हुकूमत का हिस्सा है जिसे लाखों लोगों की तकलीफ का अहसास नही या हकीकत में क्षेत्र के पास ऐसा कोई नेतृत्व ही नही जो रेल मंडल के समक्ष इस हकीकत का अहसास कराने की इक्षाशक्ति हो।  राजनीतिक भीड़ का हिस्सा बनना बताता हैं हमें अपनी शक्ति और क्षेत्र के सम्मान का अहसास नही हैं। इन मरी हुई संवेदनाओं में क्षेत्र के सम्मान की बात करना बेमानी हैं। जन आंदोलन तब बनते हैं जब अपने क्षेत्र और बस्ती की वेदना का अहसास हो,,,,,,,,,,,,चंद लोग आज नही तो कल आवाज उठाते उठाते तक जाएंगे और  हम भीड़ बनकर बर्बाद आंगन से मंजर को देखकर भी आँख मूँद लेंगे और तालिया बजाकर साबित कर देंगे हम आपके नेतृत्व से बहुत खुश हैं। आज के दौर की गणतंत्रता यही हैं।

गणतंत्र दिवस शुभ हो,,,,,,,,,,,शुभ हो,,,,,,